वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का हवाला देते हुए दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती करने की बात कही है। ट्रंप ने कहा कि इन सैन्य अभ्यासों पर अमेरिका का भारी खर्च होता है और इससे उत्तर कोरिया को अनुचित एवं शत्रुतापूर्ण संदेश जाता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास काफी महंगे हैं और इनका बड़ा खर्च अमेरिका उठाता है। उन्होंने किम जोंग उन के साथ अपने ‘बहुत अच्छे रिश्ते’ का भी जिक्र किया।
ईरान के मुद्दे पर दक्षिण कोरिया से नाराजगी?
ट्रंप के बयान में ईरान का मुद्दा भी खास तौर पर सामने आया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या उनका देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के अमेरिकी प्रयास में शामिल होना चाहेगा। ट्रंप के मुताबिक, दक्षिण कोरिया ने इसके जवाब में ‘नहीं, शुक्रिया’ कहा।
इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों में कटौती का फैसला ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में सहयोग नहीं करने से भी जुड़ा है। ट्रंप ने जापान, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अन्य सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई है।
तय कार्यक्रम के मुताबिक होगा सैन्य अभ्यास
ट्रंप के ऐलान के बावजूद दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ होने वाला उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। यह 11 दिन चलने वाला वार्षिक अभ्यास है, जिसमें करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक शामिल होने वाले हैं।
ट्रंप ने भी माना कि सोमवार से शुरू होने वाले मौजूदा अभ्यास को रद्द करना अब देर से लिया गया फैसला होगा। हालांकि उन्होंने भविष्य में ऐसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों को काफी कम करने की बात कही है।
उत्तर कोरिया पहले से करता रहा है विरोध
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का उत्तर कोरिया लंबे समय से विरोध करता रहा है। प्योंगयांग इन्हें ‘आक्रामक युद्ध की रिहर्सल’ बताता है। वहीं उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।
2019 में ट्रंप और किम जोंग उन के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर बातचीत का दौर टूटने के बाद उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को और तेज किया था।
2018 में भी ट्रंप ने रोके थे अभ्यास
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी किम जोंग उन के साथ बातचीत के दौरान अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को रोक दिया था। 2018 में परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता के बीच उन्होंने संयुक्त अभ्यासों पर रोक लगाई थी। अब एक बार फिर उनका रुख उत्तर कोरिया के साथ सैन्य तनाव कम करने की दिशा में जाता दिखाई दे रहा है।
दक्षिण कोरिया में 28,500 अमेरिकी सैनिक
दक्षिण कोरिया में करीब 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया से संभावित खतरे के खिलाफ दक्षिण कोरिया की सुरक्षा और सैन्य प्रतिरोध को मजबूत करना है।
1953 में कोरियाई युद्ध के बाद युद्धविराम हुआ था, लेकिन दोनों देशों के बीच औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ। यही वजह है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य सहयोग आज भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दक्षिण कोरिया भी बातचीत के पक्ष में
इस बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने भी उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का रास्ता खोलने की पेशकश की है। ऐसे में एक तरफ ट्रंप अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास कम करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सियोल भी प्योंगयांग के साथ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश करता नजर आ रहा है।