अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े विवाद को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चल रही बहस के बीच श्रीनिवासानंद महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंदिर में कथित चोरी की घटनाओं को लेकर उठ रहे सवालों को एक बड़े नैरेटिव से जोड़ते हुए कहा कि असल मुद्दा सिर्फ चढ़ावे की चोरी का नहीं है।
महाराज ने अपने लेख में कहा कि राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या देश और दुनिया में धार्मिक पहचान के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरी है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने और राम मंदिर के प्रति बढ़ती आस्था से भारत की सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने ताजमहल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि आजादी के बाद लंबे समय तक भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान को ताजमहल से जोड़कर देखा जाता रहा, लेकिन राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या भी वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
‘मंदिर के कर्मचारियों की गलती के लिए ट्रस्ट को चोर कहना गलत’

श्रीनिवासानंद महाराज ने मंदिर में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामलों पर कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने गलत काम किया और उसके खिलाफ कार्रवाई हुई, तो इसके लिए पूरे मंदिर ट्रस्ट को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी घर में काम करने वाला व्यक्ति चोरी करे तो क्या उसके मालिक को चोर कहा जा सकता है?
उन्होंने तिरुपति सहित देश के दूसरे बड़े मंदिरों में चढ़ावे और उसके प्रबंधन का भी उल्लेख किया और कहा कि मंदिरों में होने वाली हर चोरी को एक ही नजरिए से देखा जाना चाहिए।
‘चढ़ावा चोरी से आगे का मुद्दा’
लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर को लेकर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के वैभव और राम मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए चोरी के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।