मुंबई: भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राऊत के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि 14 करोड़ जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने हैं। संजय राऊत कितनी भी भविष्यवाणियां कर लें, देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने और केंद्रीय मंत्री बनने की उनकी इच्छा पूरी नहीं होगी। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में नवनाथ बन ने कहा कि पहले संजय राऊत अपने मालिकों और अपनी पार्टी की स्थिति देखें, उसके बाद देवेंद्र फडणवीस पर टिप्पणी करें। उन्होंने कहा, “कौए के श्राप से गाय नहीं मरती।” नवनाथ बन ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने “महाराष्ट्र की यही पुकार, अबकी बार देवाभाऊ की सरकार” के नारे के साथ देवेंद्र फडणवीस को दोबारा सत्ता सौंपी है। उन्होंने संजय राऊत पर निशाना साधते हुए कहा कि राऊत ने महाविकास आघाड़ी की सरकार के 25 साल तक चलने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन उनकी सरकार 25 महीने भी नहीं चला पाई। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने “मैं फिर आऊंगा” कहा था और वे अकेले नहीं, बल्कि पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटे। इसके विपरीत उद्धव ठाकरे के “या तो तुम रहोगे या मैं रहूंगा” वाले बयान के बाद महाराष्ट्र की जनता ने उनकी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर दी। भाजपा नेता ने संजय राऊत से कहा कि भाजपा और शिंदे गुट के बीच दरार तलाशने के बजाय उन्हें उद्धव ठाकरे और अपनी पार्टी के बीच पैदा हुई दरार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र की जनता ने उबाठा गुट को राजनीतिक रूप से खाई में धकेल दिया है और अब उसे बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा है। रोहित पवार पर भी निशाना नवनाथ बन ने एनसीपी (शरद पवार) विधायक रोहित पवार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में अराजकता पैदा करने और विद्यार्थियों का आंदोलन खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोहित पवार ने पहले एमपीएससी विद्यार्थियों को साथ लेकर आंदोलन करने की कोशिश की, लेकिन विद्यार्थी उनके साथ नहीं आए। बन के मुताबिक, महाराष्ट्र में पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं हो रही हैं, परिणाम घोषित किए जा रहे हैं और भर्तियां भी हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में रोहित पवार विधायक थे और उस दौरान एमपीएससी समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन तब उन्होंने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। नवनाथ बन ने कहा कि विद्यार्थियों को राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए और विद्यार्थी किसी राजनीतिक एजेंडे का शिकार नहीं होंगे।